वो मेरे दिल में आके रहने लगे
लोग इसको गुनाह कहने लगे ....
जब हुआ कब्ज़ा किनारे चुप थे
शोर बरपा जो शहर बहने लगे ..
जब से तुमको खुदा बनाया है
सारे मस्जिद जहाँ के ढहने लगे ..
खता कुछ तो है कातिल की मगर
हम भी क़त्ल को चुप सहने लगे.. तब अमावस याद आया मुझको बहुत
चांदनी मैं ये बदन दहने लगे
२८.दिसंबर 2010