गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

कुछ फुटकर भाव

रोग कैसा लगा लिया तुमने.. 
खुद को ही आजमा लिया तुमने...
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थपकियाँ देलूँ सुला लूँ तुमको
आओ थोडा सा रुला लूँ तुमको
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तुम गीत बनकर मेरे लबो पर ठहर गए
मैं सो न सका रात के सारे पहर गए
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२२-१२-२०१०

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