रविवार, 18 जुलाई 2010

नज़रों से काम लेता है ..

अश्क   आँखों में थाम लेता है
अब तो कम कम वो जाम देता है
क़त्ल का उसके सलीका है अज़ब
सिर्फ नज़रों से काम लेता है ..


उसके होंठों पे एक लर्जिश  है
हाय   वो मेरा  नाम  लेता है 
रिंद  कोई  न आएगा कल से 
साकी तू दूना दाम लेता है ... 

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