मंगलवार, 6 जुलाई 2010

तुम्हारी याद आई

जश्न- ए- गम मैं भी मना लूँ तो चलूँ 
ख़त मुहब्बत  के जला लूँ तो चलूँ ..

जिसने ये गम दिया वो अपने थे 
बात गैरों से छिपा लूँ तो चलूँ ..

मेरा क़ातिल बहुत ही नादाँ है
सुराग - ए- क़त्ल मिटा लूँ तो चलूँ..

चाँद भी ज़ार-ज़ार रोता है 
थपकियाँ दे के सुलालूं तो चलूँ ..

आज फिर से तुम्हारी याद आई 
आज फिर तुमको भुलालूं तो चलूँ ..

सोमवार, 5 जुलाई 2010

कितना  मुश्किल  सवाल  पूछ  लिया  
आप ने  हाल - चाल  पूछ  लिया  ..... 

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

प्यार कर बैठा

ये  मैं  कैसा  गुनाह  कर  बैठा  
एक  मुसाफिर  था  प्यार  कर  बैठा .
मुझको  मंजिल तलाशती ही रही 
राह में क्यों मैं हार कर बैठा .

बेसबब मेरा दोस्त रोता है 
कब से मेरी मजार पर बैठा .
सबने मुझको बड़ी नसीहत दी 
फिर भी आँखें मैं चार कर बैठा........... 

शनिवार, 12 जून 2010

किया क्यों तुमने ऐसा काम
राम  रहीम    रब ईसा   
हाय!  रख लिए कितने नाम.....

शुक्रवार, 14 मई 2010

यूँ  तो  मैं जल के भी रोशन रहा हूँ ,,,
तेर  घर  मैं  भी  पड़ोसन  रहा  हों

बुधवार, 12 मई 2010

.....मुक्तक ....

अब अदालत में खड़ी मूरत रुआंसी हो रही है
अब  कहाँ इस मुल्क में कातिल को फांसी हो रही है
यूँ  तो नंगे हम सभी हैं पर कसार इतनी सी है
आईने   को देखने में कुछ हया-सी हो रही है ..

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कोई  अब  गीत  लिखूं  मैं  कैसे  
दर्द  को  मीत  लिखूं  मैं  कैसे  
अग्निशैय्या  पे  चीखती  लाशें  
जलता  संगीत  लिखूं  मैं  कैसे ..  

सोमवार, 10 मई 2010

...................... असर .......................

असर यूँ इश्क दिखलाने लगा है.
हाय  वो  हमसे  शर्माने  लगा है ..

देखता  देर तक अदा अपनी
आईने से वो इतराने लगा है . .

पूछता हाल उसका है मुझसे
ज़माना मारने ताने लगा है ..

ख़त में जो उसको लिखे थे मैंने
गीत महफ़िल में वो गाने लगा है..

यूँ तो घर उसका उस तरफ से है
इसतरफ से वो अब जाने लगा है .. (पहले ही रोक दिया होता तो बिगरता नहीं ) 

अब वो उतना नहीं.... नहीं..... करता
अब  मजा उसको भी आने लगा है ...


हाय वो हमसे शर्माने लगा है..