शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

आंसू घसीट लाया हूँ होठों की कोर तक
लम्बा सफ़र है चाँद का चिड़ियों के शोर तक ... ९-१२-2011

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

कितना  जी  लेता  है  मन  तुझको  ..
 ईश  मिलता  तो  धन्यवाद  देता  उसको

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

पिघल रहा है मेरा अक्स

जिन  ग़मों  को    उँगलियाँ  पकड़ाई  बचपन  मे   

वो  जवान  होकर  मेरे  सीने   को  रौंदैं  हैं 

टीस  अब  तो  बह  चली  नयनों  के  गोमुख  से 

दिल  में  बन  तूफ़ान  कोई  बिजली  सा  कौंधें  है||



कोई  है  जो  बहुत  उदास  सा  है 

लगा  ऐसे  कि  दिल  के  पास  सा  है

 
बेवफा  है   वो  दगाबाज  भी    है 

 ..
मगर  फिर  भी  मेरे  विश्वास  सा  है||




पिघल  रहा  है  मेरा  अक्स  खो  रहा    हूँ   मैं  

अपना  चेहरा  हथेलियों  मैं  धो  रहा   हूँ   मैं||

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

करवा चौथ ..

तुम न मानो मगर ये है तो है 
कु छ मेरा तुम पे असर है  तो है 
मेरी जानिब न देखे है साकी 
मेरी सकी पे नज़र है तो है.... १४.१०.११.

मुफलिसी में भी माँ को मिले रोटियां 
इसलिए लौटती घर सुबह बेटियां ..१४.१०.

ऐसा तराशा तुमने की बिकना पड़ा मुझे 
बे मन ही बाज़ारों में सजना पड़ा मुझे.. १४.१० 



गुरुवार, 22 सितंबर 2011

जद्दोजेहद

मैं रूठ जाऊं जो तू मनाये 
ये जद्दोजेहद बहुत हंसी है ..
तुम्हारी नज़रें जाता रही हैं 
हुयी मुहब्बत अभी -अभी है ... २१-९-11


हाँ मैं कातिल हूँ गुनाहगार नहीं
तेरा प्यासा हूँ तलबगार नहीं.. २२-९-11

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

15-9-11

चले गए और खुद को मेरे पास छोड़ गए 
बे सलीका है अदा तेरे बिछड़ जाने की... 

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

सजनी सोवतु सेज अकेली

सजनी सोवतु सेज अकेली 
रिम झिम - रिमझिम पावन सावन 
परत फुहार लगत मन भावन
आवन कह नहीं आये साजन
काटत सून हवेली .

उधरत तुरपन अंगिया मोरी 
देवरा करत बहुत बरजोरी 
ऐंठी कलाई पीठी लगावत 
करत कपोल ठिठोली ..
सजनी सोवतु सेज अकेली

सोमवार, 15 अगस्त 2011

सुन लो प्रिये

   मन कोलाहल करे तो करे क्यों भला
   सुन सको तो मेरा मौन सुन लो प्रिये... ०१-०८-११

 तुम अहसास हो तुम नहीं मिटते कभी 
जी रहा है कोई तेरी आस में कहीं ...२३-५-11

सोमवार, 1 अगस्त 2011

मैं तेरा श्रृंगार .....

तुम मेरी सुगंधि हो संगिनी  
मैं  तेरा श्रृंगार ..
प्रीती रीति अरु नीति अलौकिक 
कर लो अंगीकार ....   १-८-११
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मंजिल मिल  ही जाएगी ......
भटक कर ही सही ......
गुमराह तो वो हैं जो ..
घर से निकले ही नहीं.. १३-७-११
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सहमा -सहमा हूँ मैं किसी डर से 
किसकी आँखों से ये लहू बरसे 
जिसके दिल से दुआ निकलती थी 
उसकी इक बद्दुआ को दिल तरसे .११-७-11
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प्रेम तर्कों में घुट के मर जाए 
ये तमाशा भी हो गुज़र जाए ..१-७-११
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बिना लिबास आये थे इस जहां में 
बस इक कफ़न की खातिर इतना सफ़र करना पड़ा . ७-७-११
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शुक्रवार, 17 जून 2011

jindagi

जिंदगी तेरी साजिशों में फँस गया ये दिल 

 क़त्ल जिसका हुआ उसे ही कह दिया कातिल 

कल  मुलाकात हुई खुद से तो पुछा मैंने 

कौन सी राह तेरी कौन सी तेरी मंजिल


भवरें लिपटी हैं पैरों  में सोचता हूँ  मैं 

कोई तूफ़ान जो आये तो फिर मिले साहिल 





 

 







बुधवार, 8 जून 2011

बिन तेरे मैं न जियूँगा ये कसम मुझको 
तेरी ख़ुशी मुझको तेरा  ही   गम    मुझको.

रविवार, 5 जून 2011

जिंदगी तेरी साजिशों में फंस गया ये दिल .
क़त्ल जिसका हुआ उसे ही कह दिया कातिल ..

बुधवार, 1 जून 2011

फुटकर भाव ...


तुम एहसास हो . तुम नहीं मिटते कभी 
जी रहा है कोई तेरी आस में कहीं ..
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चूड़ियों की खनक साथ ले के चली .
पायलों की झनक साथ लेके चली 
मेरी सांसों में सांसे घुली प्रेम की 
मैं पिया की महक साथ लेके चली..
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आलिंगन में प्यास जगाये जीता हूँ.
प्रणय रात्रि के दीप जलाए जीता हूँ.
नयनों से आंसूं की लडियां पिरो - पिरो 
पूर्नमिलन की आस लगाये जीता हूँ..
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तुम्हारी नज़र उठती  है मेरे पोशीदा कॉलर पे 
गिरेबाँ चाक है तेरा मैं पकडूँ तो कहाँ से पकडूँ.
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अतीत हो गया दफ़न मेरा गुनाहों में 
मैं खुद को भीच के बैठा हूँ अपनी बाहों में..
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जो भी थोडा बचा हुआ हूँ मैं 
बद दुआओं  में जी रहा हूँ मैं..
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इतिहास बन गयी है मेरे गाँव की नदी 
खुद प्यास बन गयी है मेरे गाँव की नदी .
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रूह शामिल है मेरी रूह में तुम्हारी 
बाद तेरे भी रही तेरी ही खुमारी..

बज़्म में ग़ज़ल मेरी..

मेरे ज़ज्बात का सबने लगाया अंदाजा 
सबको अपनी सी लगी बज़्म में ग़ज़ल मेरी.. 

कोई तरकीब तो हो तुमको भुला दूँ मैं भी 
याद में तेरी जली बज़्म में ग़ज़ल मेरी ..

ठुमक - ठुमक के चली बज़्म में ग़ज़ल मेरी 
हर एक शै से मिली बज़्म में ग़ज़ल मेरी..

बिक रही है सरे बाज़ार चंद सिक्कों में 
अब तो रोटी पे बिकी बज़्म में ग़ज़ल मेरी .. 

लोग झुमका तलाशते हैं जिन बाजारों में 
वहीँ कहीं पे गिरी बज़्म में ग़ज़ल मेरी .........२९-४-११

गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

खुशबुओं की मुलाक़ात भी है ,

जिन्दगी --
एक जिद्दी बच्चे की तरह 
बिफर गयी ...

क्योंकि वह जानती है 
 कि जिन्दगी एक तपती दोपहरी ही नहीं ,
खुशबुओं की मुलाक़ात भी है ,

सौम्य- मुस्कानों की बहार ही नहीं 
एक प्यार भी है ,

एक विश्वास ही नहीं 
सपनीला संसार भी है.

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

यूँ ही ..

रूह शामिल है मेरी रूह में तुम्हारी 
बाद तेरे भी रहे तेरी ही खुमारी ..२४.४.२०११ 

तुमको थोडा सा भुला लूँगा तो सो जाऊँगा
जगा के तुमको सुला लूँगा तो सो जाऊँगा.. ३१.३.११

इश्क हो जाए

इश्क हो जाए तो कर लेना ,मगर ये याद रहे 
माँ- बाप ने भेजा है तुम्हे पढने   पढ़ाने ..
जलता है कलेजा टीस उठती है दिल में 
वो मुझ को गिनाएं हैं उनके कितने दीवाने ..

ये ज़ुल्फ़ नयन होंठ गोरे गाल काला तिल
क्यों देती है कुदरत किसी को इतने खजाने ..

सोमवार, 14 मार्च 2011

न कीजे ...

सियासत की तरफदारी न कीजे 
अजी ऐसी भी बेगारी न कीजे
बहुत मुश्किल निभाना दुश्मनी है 
किसी अपने से गद्दारी न कीजे 

वो बिटिया है , है दिल उसका भी कोमल 
मुहब्बत में उजरदारी न कीजे   

शहादत सर पटकती दफ्तरों में 
मदद ऐसी भी सरकारी न कीजे 

रविवार, 13 फ़रवरी 2011

मैं तुमको प्यार करके जी रहा हूँ

मैं तुमको प्यार करके जी रहा हूँ 
तेरे होठों की मदिरा पी रहा हूँ ..

हूँ तो मुफलिस मगर सुना है ये
दौलते दिल का मालिक भी रहा हूँ ..
 Sent at 9:29 AM on Sunday

शनिवार, 29 जनवरी 2011

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

सियासत मत तलाशो...

गए क़दमों की आहट मत तलाशो 
वसीयत में वरासत  मत तलाशो
ये दिल है .. टूटेगा तो रो पड़ोगे 
मुहब्बत में सियासत मत तलाशो... १४-०१-2011

जीना दुश्वार कर लिया तूने 
ये किसे प्यार कर लिया तूने