मंगलवार, 6 सितंबर 2011

सजनी सोवतु सेज अकेली

सजनी सोवतु सेज अकेली 
रिम झिम - रिमझिम पावन सावन 
परत फुहार लगत मन भावन
आवन कह नहीं आये साजन
काटत सून हवेली .

उधरत तुरपन अंगिया मोरी 
देवरा करत बहुत बरजोरी 
ऐंठी कलाई पीठी लगावत 
करत कपोल ठिठोली ..
सजनी सोवतु सेज अकेली

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