गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

खुशबुओं की मुलाक़ात भी है ,

जिन्दगी --
एक जिद्दी बच्चे की तरह 
बिफर गयी ...

क्योंकि वह जानती है 
 कि जिन्दगी एक तपती दोपहरी ही नहीं ,
खुशबुओं की मुलाक़ात भी है ,

सौम्य- मुस्कानों की बहार ही नहीं 
एक प्यार भी है ,

एक विश्वास ही नहीं 
सपनीला संसार भी है.

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