शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

देखो कुछ कह रहा है कोई


प्रेम अद्भुत है .. ... हृदय बेवाई है ....पर दर्द बेमिसाल है ... मिलन से कहीं ज्यादा ..मिलन अभिलाषा मैं 

आनंद है .. अकथ्य है .. अवर्णनीय है .. चुप रहो .. देखो कुछ कह रहा है कोई 

पुलकित मन की आर्त व्यथा को 



मैं आलिंगन बद्ध करूं तो 


प्रेम पाश के पावन क्षण को 


पुष्पांजलि कर बद्ध करूं तो 


कोई मुझको कुछ न कहेगा 


मैं सच बोलूं मन के तल से

प्रेम गीत है परिणय मन का

प्रणय गीत लय  बद्ध करूं तो 
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मैं खुशी इतनी कहाँ पर रखती 

बेच कर मुफलिसी खरीदी है 

मौत से कह दो आजमा ले मुझे 

इश्क है आशिकी खरीदी है 

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तेरा  आना  भी  है   क़यामत  जी  

मैं  हूँ  बर्बाद  औ  सलामत  भी 

तू   अमानत  है  मेरी  जानता    हूँ  

मैं  ख्यालात   मैं  कायनात  भी ..


हाशिये  पर  लिखा  हूँ  हर्फ़  मगर  

जो  भी  पढता  है  जरूर  पढता  है ..


वो बख्श के भी मुझको हुआ मुतमईन नहीं 

ये कम सजा थी मेरे खता के मुकाबले


बहुत  मजबूरियां  जीने  से  अच्छा  

चलो  कुछ  दायरे  हम  तोड़  डालें ..


किसी  की  बात  पे  इतना  न  हसना 

की  वो  होकर  चला  जाये  रुआंसा...


कि राशन की दुकानों पर कतारें 

लड़ाई भूख से लंबी है कितनी

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