जाने लगता है वो तारीफ़ मेरी जब करके
आइना घूरता है , कनखियों से मैं देखूं ||
हाथ में हाथ लिए उंगलिया चिटकता है
इलाज दर्द का वो दे के दर्द करता रहा ||
चन्द टिप्पों के बाद डूबना इसे होगा
दिल को कितने भी करीने से झील पर फेंको ||
अगर तू होता तो कांधे पे मैं चला जाता
घिसट घिसट के चला श्मशान बिन तेरे ||
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