मैं प्यार कर रहा हूँ हर शाम की तरह
तेरे लबों पे छलकुंगा एक जाम की तरह ..
अंगडाई ले के उठ चले लहरा के वदन वो
मेरी ग़ज़ल के मक्ते के उनमान की तरह ..
तेरे वदन पे छन्न से जल के मिट रहा हूँ यूँ
जलते तवे पे छीटों के अंजाम की तरह ..
तेरे लबो पे गालियाँ किस्मत से आई हैं
रत्ना तेरा अपमान है सम्मान की तरह ..
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तुमको प्यासा रख कर मैं भी दरिया न रहा .
खुद के बारे में तेरे जैसा नजरिया न रहा ..
गुस्ताखियाँ हैं माना चलो मुस्कुरा तो दो.
कितना माना रहा हूँ तवज्जो ज़रा तो दो ..
मैं एक नया दर्द तुमको देने वाला हूँ .
सिसकियों के बीच मज़ा लेने वाला हूँ ..
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