शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

मैं तुम्हारा रहूँगा सदा ही प्रिये ....

मैं तुम्हारा रहूँगा सदा ही प्रिये 
खींच दो चाहें कदमो में तुम हाशिए ..

सारे शेरों में चेहरा तेरा ही सजन 
लफ्ज़ बदले कभी और कभी काफिये ..

है पुरानी गज़ल में नया शेर भी 
थाम कर दिल ज़रा गौर फरमाइए ..

कोई दावा नहीं न मुक़ाबिल तेरा 
इश्क गहरा मेरा कितना मत नापिए ..२० .९. २०१२ 

मंगलवार, 28 अगस्त 2012

कल 'मरणोपरांत' नाटक देखने से उपजे शेर ... लखनऊ ..

मेरे वजूद में वफ़ा से ऊब कर कोई 
हर वक्त एक नयी वेवफाई तलाशे ..

मैं दिल पे उसके दुनिया नयी तो बसा गया 
पर गैर उँगलियों के निशाँ कैसे मिटाता ..

अजीब कशमकश है तुम्हारे वजूद में 
क्यों चाहता हूँ तुमको कोई और न चाहे ..

बस इतनी बात सुनकर हूँ सुकूं में दर्द कुछ कम है 
तू मेरी फ़िक्र का है जिक्र करती उसकी बाहों में ..

त्रिशंकु ही रहा मेरा सफर मंजिल कहाँ मिलती 
तेरी दुत्कार में भी प्यार झलक जाए है ..

सोमवार, 6 अगस्त 2012

२१.१२.२०११

कोई सुन लेगा तो अफसाना बना देगा ही 
ऐसे जाना मेरे दिल से कोई आहट न हो .. २१ . १२. २०११ 

रविवार, 29 जुलाई 2012

अधूरी कहानी है जन्मो से अपनी

किसी बात का मत बुरा मन जाना 
अभी जाने क्या क्या कहेगा ज़माना .

अधूरी कहानी है जन्मो से अपनी 
तुझे पाके खोना तुझे खोके पाना .

बहुत काम है इश्क में दिलको यारों 
वो हंसना हसाना , वो रोना रुलाना .

नवाज़ा है कितने खिताबो से तुम ने 
तू मजनू , तू आशिक तू पागल दीवाना .
....... 

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

जिन्दगी बेमिसाल है यारों



मोहरे हैं और चाल है यारों


ज्यों ही देने लगा जबाब कोई


त्यों ही बदले सवाल हैं यारों .. अखिलेश



शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

देखो कुछ कह रहा है कोई


प्रेम अद्भुत है .. ... हृदय बेवाई है ....पर दर्द बेमिसाल है ... मिलन से कहीं ज्यादा ..मिलन अभिलाषा मैं 

आनंद है .. अकथ्य है .. अवर्णनीय है .. चुप रहो .. देखो कुछ कह रहा है कोई 

पुलकित मन की आर्त व्यथा को 



मैं आलिंगन बद्ध करूं तो 


प्रेम पाश के पावन क्षण को 


पुष्पांजलि कर बद्ध करूं तो 


कोई मुझको कुछ न कहेगा 


मैं सच बोलूं मन के तल से

प्रेम गीत है परिणय मन का

प्रणय गीत लय  बद्ध करूं तो 
..................................................

मैं खुशी इतनी कहाँ पर रखती 

बेच कर मुफलिसी खरीदी है 

मौत से कह दो आजमा ले मुझे 

इश्क है आशिकी खरीदी है 

.........................................
तेरा  आना  भी  है   क़यामत  जी  

मैं  हूँ  बर्बाद  औ  सलामत  भी 

तू   अमानत  है  मेरी  जानता    हूँ  

मैं  ख्यालात   मैं  कायनात  भी ..


हाशिये  पर  लिखा  हूँ  हर्फ़  मगर  

जो  भी  पढता  है  जरूर  पढता  है ..


वो बख्श के भी मुझको हुआ मुतमईन नहीं 

ये कम सजा थी मेरे खता के मुकाबले


बहुत  मजबूरियां  जीने  से  अच्छा  

चलो  कुछ  दायरे  हम  तोड़  डालें ..


किसी  की  बात  पे  इतना  न  हसना 

की  वो  होकर  चला  जाये  रुआंसा...


कि राशन की दुकानों पर कतारें 

लड़ाई भूख से लंबी है कितनी

मंगलवार, 10 जनवरी 2012

दर्द



जाने  लगता  है  वो  तारीफ़  मेरी  जब  करके  
आइना  घूरता  है  , कनखियों  से  मैं  देखूं ||


हाथ  में   हाथ  लिए  उंगलिया  चिटकता  है  
इलाज  दर्द  का  वो  दे  के  दर्द  करता  रहा ||


चन्द  टिप्पों  के  बाद   डूबना  इसे  होगा  
दिल  को  कितने  भी  करीने  से  झील  पर  फेंको ||


अगर  तू  होता  तो  कांधे  पे  मैं  चला  जाता  
घिसट  घिसट  के  चला  श्मशान  बिन तेरे ||

चन्द शेर ........


मैं प्यार कर रहा हूँ हर शाम की तरह 
तेरे लबों पे छलकुंगा एक जाम की तरह ..

अंगडाई ले के उठ चले लहरा के वदन वो 
मेरी ग़ज़ल के मक्ते के उनमान की तरह ..

तेरे वदन पे छन्न से जल के मिट रहा हूँ यूँ 
जलते तवे पे छीटों के अंजाम की तरह ..

तेरे लबो पे गालियाँ किस्मत से आई हैं  
रत्ना  तेरा अपमान है सम्मान की तरह ..

*********
तुमको प्यासा रख कर मैं भी दरिया न रहा .
खुद के बारे में तेरे जैसा नजरिया न रहा ..
गुस्ताखियाँ हैं माना चलो मुस्कुरा तो  दो.
कितना माना रहा हूँ तवज्जो ज़रा तो दो ..

मैं एक नया दर्द तुमको देने वाला हूँ .
सिसकियों के बीच मज़ा लेने वाला हूँ ..