रविवार, 18 जुलाई 2010

नज़रों से काम लेता है ..

अश्क   आँखों में थाम लेता है
अब तो कम कम वो जाम देता है
क़त्ल का उसके सलीका है अज़ब
सिर्फ नज़रों से काम लेता है ..


उसके होंठों पे एक लर्जिश  है
हाय   वो मेरा  नाम  लेता है 
रिंद  कोई  न आएगा कल से 
साकी तू दूना दाम लेता है ... 

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

मैंने चाहा तुझको

मैं अपनी नज़रों से नज़रें मिला नहीं पाया  
मैं  आईने  में  कभी  मुस्कुरा  नहीं  पाया ..
मुझे पता ही नहीं देखता मुझे कोई
मैं अपने साए में खुद को छिपा नहीं पाया ..
सभी खताओ से ज्यादा बड़ी खता ये हुई
बताना चाहा तुझे पर बता नहीं पाया ..
तेरी नज़र से गिरा तुमने उठाया झुक कर
मैं खुद की नज़रों में खुद को उठा नहीं पाया..
जुल्म इक और करूँ बस इसी लिए जिंदा
मैंने चाहा तुझको ये जता नहीं पाया ..
 

मंगलवार, 6 जुलाई 2010

तुम्हारी याद आई

जश्न- ए- गम मैं भी मना लूँ तो चलूँ 
ख़त मुहब्बत  के जला लूँ तो चलूँ ..

जिसने ये गम दिया वो अपने थे 
बात गैरों से छिपा लूँ तो चलूँ ..

मेरा क़ातिल बहुत ही नादाँ है
सुराग - ए- क़त्ल मिटा लूँ तो चलूँ..

चाँद भी ज़ार-ज़ार रोता है 
थपकियाँ दे के सुलालूं तो चलूँ ..

आज फिर से तुम्हारी याद आई 
आज फिर तुमको भुलालूं तो चलूँ ..

सोमवार, 5 जुलाई 2010

कितना  मुश्किल  सवाल  पूछ  लिया  
आप ने  हाल - चाल  पूछ  लिया  ..... 

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

प्यार कर बैठा

ये  मैं  कैसा  गुनाह  कर  बैठा  
एक  मुसाफिर  था  प्यार  कर  बैठा .
मुझको  मंजिल तलाशती ही रही 
राह में क्यों मैं हार कर बैठा .

बेसबब मेरा दोस्त रोता है 
कब से मेरी मजार पर बैठा .
सबने मुझको बड़ी नसीहत दी 
फिर भी आँखें मैं चार कर बैठा...........