अश्क आँखों में थाम लेता है
अब तो कम कम वो जाम देता है
क़त्ल का उसके सलीका है अज़ब
सिर्फ नज़रों से काम लेता है ..
उसके होंठों पे एक लर्जिश है
हाय वो मेरा नाम लेता है
रिंद कोई न आएगा कल से
साकी तू दूना दाम लेता है ...
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....
रविवार, 18 जुलाई 2010
गुरुवार, 15 जुलाई 2010
मैंने चाहा तुझको
मैं अपनी नज़रों से नज़रें मिला नहीं पाया
मैं आईने में कभी मुस्कुरा नहीं पाया ..
मुझे पता ही नहीं देखता मुझे कोई
मैं अपने साए में खुद को छिपा नहीं पाया ..
सभी खताओ से ज्यादा बड़ी खता ये हुई
बताना चाहा तुझे पर बता नहीं पाया ..
तेरी नज़र से गिरा तुमने उठाया झुक कर
मैं खुद की नज़रों में खुद को उठा नहीं पाया..
जुल्म इक और करूँ बस इसी लिए जिंदा
मैंने चाहा तुझको ये जता नहीं पाया ..
मैं आईने में कभी मुस्कुरा नहीं पाया ..
मुझे पता ही नहीं देखता मुझे कोई
मैं अपने साए में खुद को छिपा नहीं पाया ..
सभी खताओ से ज्यादा बड़ी खता ये हुई
बताना चाहा तुझे पर बता नहीं पाया ..
तेरी नज़र से गिरा तुमने उठाया झुक कर
मैं खुद की नज़रों में खुद को उठा नहीं पाया..
जुल्म इक और करूँ बस इसी लिए जिंदा
मैंने चाहा तुझको ये जता नहीं पाया ..
मंगलवार, 6 जुलाई 2010
तुम्हारी याद आई
जश्न- ए- गम मैं भी मना लूँ तो चलूँ
ख़त मुहब्बत के जला लूँ तो चलूँ ..
जिसने ये गम दिया वो अपने थे
बात गैरों से छिपा लूँ तो चलूँ ..
मेरा क़ातिल बहुत ही नादाँ है
सुराग - ए- क़त्ल मिटा लूँ तो चलूँ..
चाँद भी ज़ार-ज़ार रोता है
थपकियाँ दे के सुलालूं तो चलूँ ..
आज फिर से तुम्हारी याद आई
आज फिर तुमको भुलालूं तो चलूँ ..
ख़त मुहब्बत के जला लूँ तो चलूँ ..
जिसने ये गम दिया वो अपने थे
बात गैरों से छिपा लूँ तो चलूँ ..
मेरा क़ातिल बहुत ही नादाँ है
सुराग - ए- क़त्ल मिटा लूँ तो चलूँ..
चाँद भी ज़ार-ज़ार रोता है
थपकियाँ दे के सुलालूं तो चलूँ ..
आज फिर से तुम्हारी याद आई
आज फिर तुमको भुलालूं तो चलूँ ..
शुक्रवार, 2 जुलाई 2010
प्यार कर बैठा
ये मैं कैसा गुनाह कर बैठा
एक मुसाफिर था प्यार कर बैठा .
मुझको मंजिल तलाशती ही रही
राह में क्यों मैं हार कर बैठा .
बेसबब मेरा दोस्त रोता है
कब से मेरी मजार पर बैठा .
सबने मुझको बड़ी नसीहत दी
फिर भी आँखें मैं चार कर बैठा...........
एक मुसाफिर था प्यार कर बैठा .
मुझको मंजिल तलाशती ही रही
राह में क्यों मैं हार कर बैठा .
बेसबब मेरा दोस्त रोता है
कब से मेरी मजार पर बैठा .
सबने मुझको बड़ी नसीहत दी
फिर भी आँखें मैं चार कर बैठा...........
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)