शुक्रवार, 14 मई 2010

यूँ  तो  मैं जल के भी रोशन रहा हूँ ,,,
तेर  घर  मैं  भी  पड़ोसन  रहा  हों

बुधवार, 12 मई 2010

.....मुक्तक ....

अब अदालत में खड़ी मूरत रुआंसी हो रही है
अब  कहाँ इस मुल्क में कातिल को फांसी हो रही है
यूँ  तो नंगे हम सभी हैं पर कसार इतनी सी है
आईने   को देखने में कुछ हया-सी हो रही है ..

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कोई  अब  गीत  लिखूं  मैं  कैसे  
दर्द  को  मीत  लिखूं  मैं  कैसे  
अग्निशैय्या  पे  चीखती  लाशें  
जलता  संगीत  लिखूं  मैं  कैसे ..  

सोमवार, 10 मई 2010

...................... असर .......................

असर यूँ इश्क दिखलाने लगा है.
हाय  वो  हमसे  शर्माने  लगा है ..

देखता  देर तक अदा अपनी
आईने से वो इतराने लगा है . .

पूछता हाल उसका है मुझसे
ज़माना मारने ताने लगा है ..

ख़त में जो उसको लिखे थे मैंने
गीत महफ़िल में वो गाने लगा है..

यूँ तो घर उसका उस तरफ से है
इसतरफ से वो अब जाने लगा है .. (पहले ही रोक दिया होता तो बिगरता नहीं ) 

अब वो उतना नहीं.... नहीं..... करता
अब  मजा उसको भी आने लगा है ...


हाय वो हमसे शर्माने लगा है..