शनिवार, 13 नवंबर 2010

तू भी है

मै   हूँ  मुलजिम  , तो  गुनाहगार  तू  भी  है
मेरी  तरह   सज़ा  की  , तलबगार  तू  भी  है ..
मै  हूँ  खुशनसीब  , आगोश    में   तेरे
तो  बाँहों  में  मेरी  गिरफ्तार  तू  भी  है ..

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

तू जमीन है तू आसमान है मेरा
तू ही जन्नत है  तू ही हूर भी है

होश है तू है तू ही मदहोशी
नशा भी तू नशे में चूर भी है

खो न दूं तुमको ये darr  भी है
तू तो मेरी है ये गुरूर भी है

शुक्रवार, 10 सितंबर 2010

तू   मेरे   पास  भी  है  और  दूर  भी  है..
मेरी  बाहों  में  छिपी है .. मजबूर भी है... 
दुनिया बहुत बड़ी सही कूप मंडूकता उससे जीत जाती है ,,, मैं वापस आ गया  ,, अच्छा लगा वापस आना ,, जैसे कहीं गया ही न था ,, तुम फिर मिल गए ,,, वहीँ खडे मेरे इंतजार मैं ,, कुछ नहीं बदला ,,, दुनिया बड़ी है तो ठेंगे से

बुधवार, 11 अगस्त 2010

क्या होगा.. ????

कहीं  सिमटा  हुआ  एक  पल  बिखर  जाए  तो  क्या  होगा  
तुम्हारा अक्स दर्पण में सिहर जाए तो क्या होगा
चलो लेकर चलें , एक छोटी  - सी दुनियां सफीने में ...
तुम्हारा प्यार जीवन से निकल जाए तो  क्या  होगा ????

रविवार, 18 जुलाई 2010

नज़रों से काम लेता है ..

अश्क   आँखों में थाम लेता है
अब तो कम कम वो जाम देता है
क़त्ल का उसके सलीका है अज़ब
सिर्फ नज़रों से काम लेता है ..


उसके होंठों पे एक लर्जिश  है
हाय   वो मेरा  नाम  लेता है 
रिंद  कोई  न आएगा कल से 
साकी तू दूना दाम लेता है ... 

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

मैंने चाहा तुझको

मैं अपनी नज़रों से नज़रें मिला नहीं पाया  
मैं  आईने  में  कभी  मुस्कुरा  नहीं  पाया ..
मुझे पता ही नहीं देखता मुझे कोई
मैं अपने साए में खुद को छिपा नहीं पाया ..
सभी खताओ से ज्यादा बड़ी खता ये हुई
बताना चाहा तुझे पर बता नहीं पाया ..
तेरी नज़र से गिरा तुमने उठाया झुक कर
मैं खुद की नज़रों में खुद को उठा नहीं पाया..
जुल्म इक और करूँ बस इसी लिए जिंदा
मैंने चाहा तुझको ये जता नहीं पाया ..