बुधवार, 8 दिसंबर 2010

मोहब्बत हो न जाये

मुझे तुमसे मोहब्बत हो न जाये 
सुकून मेरा कहीं पे खो न जाये 

इरादा तो है तुमको चूम लूँ पर 
तुम्हारा गाल जूठा हो न जाये
 
लोरी मां की अधूरी  रह ही गई है 
कहीं वो सुनते सुनते सो न जाए

रविवार, 5 दिसंबर 2010

आपका - अखिलेश

मित्रो ! आपका स्नेह मुझे मिलता रहता है.. कई बार मै व्यस्त होने की वजह से उत्तर नहीं दे पाता... आपसब क्षमा के साथ अपना स्नेह बनाए रखेंगे ... आपका - अखिलेश
मुफलिसी मुह चिढाती कुबेरों को है.
रेत पर जिंदा रहने लगी मछलियाँ ..
बज़्म में खून से कुछ सने हाथ हैं
उजले कपडे में वे हैं बड़ी हस्तियाँ ..

शनिवार, 13 नवंबर 2010

तू भी है

मै   हूँ  मुलजिम  , तो  गुनाहगार  तू  भी  है
मेरी  तरह   सज़ा  की  , तलबगार  तू  भी  है ..
मै  हूँ  खुशनसीब  , आगोश    में   तेरे
तो  बाँहों  में  मेरी  गिरफ्तार  तू  भी  है ..

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

तू जमीन है तू आसमान है मेरा
तू ही जन्नत है  तू ही हूर भी है

होश है तू है तू ही मदहोशी
नशा भी तू नशे में चूर भी है

खो न दूं तुमको ये darr  भी है
तू तो मेरी है ये गुरूर भी है

शुक्रवार, 10 सितंबर 2010

तू   मेरे   पास  भी  है  और  दूर  भी  है..
मेरी  बाहों  में  छिपी है .. मजबूर भी है... 
दुनिया बहुत बड़ी सही कूप मंडूकता उससे जीत जाती है ,,, मैं वापस आ गया  ,, अच्छा लगा वापस आना ,, जैसे कहीं गया ही न था ,, तुम फिर मिल गए ,,, वहीँ खडे मेरे इंतजार मैं ,, कुछ नहीं बदला ,,, दुनिया बड़ी है तो ठेंगे से

बुधवार, 11 अगस्त 2010

क्या होगा.. ????

कहीं  सिमटा  हुआ  एक  पल  बिखर  जाए  तो  क्या  होगा  
तुम्हारा अक्स दर्पण में सिहर जाए तो क्या होगा
चलो लेकर चलें , एक छोटी  - सी दुनियां सफीने में ...
तुम्हारा प्यार जीवन से निकल जाए तो  क्या  होगा ????