गुरुवार, 22 सितंबर 2011

जद्दोजेहद

मैं रूठ जाऊं जो तू मनाये 
ये जद्दोजेहद बहुत हंसी है ..
तुम्हारी नज़रें जाता रही हैं 
हुयी मुहब्बत अभी -अभी है ... २१-९-11


हाँ मैं कातिल हूँ गुनाहगार नहीं
तेरा प्यासा हूँ तलबगार नहीं.. २२-९-11

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

15-9-11

चले गए और खुद को मेरे पास छोड़ गए 
बे सलीका है अदा तेरे बिछड़ जाने की... 

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

सजनी सोवतु सेज अकेली

सजनी सोवतु सेज अकेली 
रिम झिम - रिमझिम पावन सावन 
परत फुहार लगत मन भावन
आवन कह नहीं आये साजन
काटत सून हवेली .

उधरत तुरपन अंगिया मोरी 
देवरा करत बहुत बरजोरी 
ऐंठी कलाई पीठी लगावत 
करत कपोल ठिठोली ..
सजनी सोवतु सेज अकेली