सोमवार, 15 अगस्त 2011

सुन लो प्रिये

   मन कोलाहल करे तो करे क्यों भला
   सुन सको तो मेरा मौन सुन लो प्रिये... ०१-०८-११

 तुम अहसास हो तुम नहीं मिटते कभी 
जी रहा है कोई तेरी आस में कहीं ...२३-५-11

सोमवार, 1 अगस्त 2011

मैं तेरा श्रृंगार .....

तुम मेरी सुगंधि हो संगिनी  
मैं  तेरा श्रृंगार ..
प्रीती रीति अरु नीति अलौकिक 
कर लो अंगीकार ....   १-८-११
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मंजिल मिल  ही जाएगी ......
भटक कर ही सही ......
गुमराह तो वो हैं जो ..
घर से निकले ही नहीं.. १३-७-११
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सहमा -सहमा हूँ मैं किसी डर से 
किसकी आँखों से ये लहू बरसे 
जिसके दिल से दुआ निकलती थी 
उसकी इक बद्दुआ को दिल तरसे .११-७-11
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प्रेम तर्कों में घुट के मर जाए 
ये तमाशा भी हो गुज़र जाए ..१-७-११
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बिना लिबास आये थे इस जहां में 
बस इक कफ़न की खातिर इतना सफ़र करना पड़ा . ७-७-११
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