तुम एहसास हो . तुम नहीं मिटते कभी
जी रहा है कोई तेरी आस में कहीं ..
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चूड़ियों की खनक साथ ले के चली .
पायलों की झनक साथ लेके चली
मेरी सांसों में सांसे घुली प्रेम की
मैं पिया की महक साथ लेके चली..
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आलिंगन में प्यास जगाये जीता हूँ.
प्रणय रात्रि के दीप जलाए जीता हूँ.
नयनों से आंसूं की लडियां पिरो - पिरो
पूर्नमिलन की आस लगाये जीता हूँ..
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तुम्हारी नज़र उठती है मेरे पोशीदा कॉलर पे
गिरेबाँ चाक है तेरा मैं पकडूँ तो कहाँ से पकडूँ.
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अतीत हो गया दफ़न मेरा गुनाहों में
मैं खुद को भीच के बैठा हूँ अपनी बाहों में..
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जो भी थोडा बचा हुआ हूँ मैं
बद दुआओं में जी रहा हूँ मैं..
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इतिहास बन गयी है मेरे गाँव की नदी
खुद प्यास बन गयी है मेरे गाँव की नदी .
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रूह शामिल है मेरी रूह में तुम्हारी
बाद तेरे भी रही तेरी ही खुमारी..