शुक्रवार, 17 जून 2011

jindagi

जिंदगी तेरी साजिशों में फँस गया ये दिल 

 क़त्ल जिसका हुआ उसे ही कह दिया कातिल 

कल  मुलाकात हुई खुद से तो पुछा मैंने 

कौन सी राह तेरी कौन सी तेरी मंजिल


भवरें लिपटी हैं पैरों  में सोचता हूँ  मैं 

कोई तूफ़ान जो आये तो फिर मिले साहिल 





 

 







बुधवार, 8 जून 2011

बिन तेरे मैं न जियूँगा ये कसम मुझको 
तेरी ख़ुशी मुझको तेरा  ही   गम    मुझको.

रविवार, 5 जून 2011

जिंदगी तेरी साजिशों में फंस गया ये दिल .
क़त्ल जिसका हुआ उसे ही कह दिया कातिल ..

बुधवार, 1 जून 2011

फुटकर भाव ...


तुम एहसास हो . तुम नहीं मिटते कभी 
जी रहा है कोई तेरी आस में कहीं ..
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चूड़ियों की खनक साथ ले के चली .
पायलों की झनक साथ लेके चली 
मेरी सांसों में सांसे घुली प्रेम की 
मैं पिया की महक साथ लेके चली..
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आलिंगन में प्यास जगाये जीता हूँ.
प्रणय रात्रि के दीप जलाए जीता हूँ.
नयनों से आंसूं की लडियां पिरो - पिरो 
पूर्नमिलन की आस लगाये जीता हूँ..
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तुम्हारी नज़र उठती  है मेरे पोशीदा कॉलर पे 
गिरेबाँ चाक है तेरा मैं पकडूँ तो कहाँ से पकडूँ.
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अतीत हो गया दफ़न मेरा गुनाहों में 
मैं खुद को भीच के बैठा हूँ अपनी बाहों में..
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जो भी थोडा बचा हुआ हूँ मैं 
बद दुआओं  में जी रहा हूँ मैं..
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इतिहास बन गयी है मेरे गाँव की नदी 
खुद प्यास बन गयी है मेरे गाँव की नदी .
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रूह शामिल है मेरी रूह में तुम्हारी 
बाद तेरे भी रही तेरी ही खुमारी..

बज़्म में ग़ज़ल मेरी..

मेरे ज़ज्बात का सबने लगाया अंदाजा 
सबको अपनी सी लगी बज़्म में ग़ज़ल मेरी.. 

कोई तरकीब तो हो तुमको भुला दूँ मैं भी 
याद में तेरी जली बज़्म में ग़ज़ल मेरी ..

ठुमक - ठुमक के चली बज़्म में ग़ज़ल मेरी 
हर एक शै से मिली बज़्म में ग़ज़ल मेरी..

बिक रही है सरे बाज़ार चंद सिक्कों में 
अब तो रोटी पे बिकी बज़्म में ग़ज़ल मेरी .. 

लोग झुमका तलाशते हैं जिन बाजारों में 
वहीँ कहीं पे गिरी बज़्म में ग़ज़ल मेरी .........२९-४-११