जिन्दगी --
एक जिद्दी बच्चे की तरह
बिफर गयी ...
क्योंकि वह जानती है
कि जिन्दगी एक तपती दोपहरी ही नहीं ,
खुशबुओं की मुलाक़ात भी है ,
सौम्य- मुस्कानों की बहार ही नहीं
एक प्यार भी है ,
एक विश्वास ही नहीं
सपनीला संसार भी है.
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....