गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

खुशबुओं की मुलाक़ात भी है ,

जिन्दगी --
एक जिद्दी बच्चे की तरह 
बिफर गयी ...

क्योंकि वह जानती है 
 कि जिन्दगी एक तपती दोपहरी ही नहीं ,
खुशबुओं की मुलाक़ात भी है ,

सौम्य- मुस्कानों की बहार ही नहीं 
एक प्यार भी है ,

एक विश्वास ही नहीं 
सपनीला संसार भी है.

मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

यूँ ही ..

रूह शामिल है मेरी रूह में तुम्हारी 
बाद तेरे भी रहे तेरी ही खुमारी ..२४.४.२०११ 

तुमको थोडा सा भुला लूँगा तो सो जाऊँगा
जगा के तुमको सुला लूँगा तो सो जाऊँगा.. ३१.३.११

इश्क हो जाए

इश्क हो जाए तो कर लेना ,मगर ये याद रहे 
माँ- बाप ने भेजा है तुम्हे पढने   पढ़ाने ..
जलता है कलेजा टीस उठती है दिल में 
वो मुझ को गिनाएं हैं उनके कितने दीवाने ..

ये ज़ुल्फ़ नयन होंठ गोरे गाल काला तिल
क्यों देती है कुदरत किसी को इतने खजाने ..