सोमवार, 7 जनवरी 2013

श्री गुरु के चरणों मैं कैसे मलिन शीश रख पाऊँगा
नयन छुपा कर कैसे गुरुवर के सम्मुख आ पाऊँगा 
अब न कीजे मेरी गुस्ताखियों से शिकवा गिला

इनकी तफ्तीश मैं नाम आपका भी आएगा 
krodh paap kar mool ..    
एक मौत आई दिल्ली में .
रोने लगी  व्यवस्था ...

चीख चीख कर गा ली देते ..
सब दिखलाते  रस्ता ..
बहुत दिनों पहले की बात तो नहीं .. मैं ब्लॉग नहीं लिखता था , मेरे लिखे शब्द खुद बी खुद ब्लॉग मैं चाप जाया करते थे .. अब सेटिंग गड़बड़ हो गई ... तरी कर रहा हूँ क्या मैं लिख पाऊँगा

मेरे खत में जो उदासी झलके ...
वो मेरी रूह कि ग़ज़ल भी है .

शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

मैं तुम्हारा रहूँगा सदा ही प्रिये ....

मैं तुम्हारा रहूँगा सदा ही प्रिये 
खींच दो चाहें कदमो में तुम हाशिए ..

सारे शेरों में चेहरा तेरा ही सजन 
लफ्ज़ बदले कभी और कभी काफिये ..

है पुरानी गज़ल में नया शेर भी 
थाम कर दिल ज़रा गौर फरमाइए ..

कोई दावा नहीं न मुक़ाबिल तेरा 
इश्क गहरा मेरा कितना मत नापिए ..२० .९. २०१२