श्री गुरु के चरणों मैं कैसे मलिन शीश रख पाऊँगा
नयन छुपा कर कैसे गुरुवर के सम्मुख आ पाऊँगा
नयन छुपा कर कैसे गुरुवर के सम्मुख आ पाऊँगा
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....