krodh paap kar mool ..
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....
सोमवार, 7 जनवरी 2013
शुक्रवार, 28 सितंबर 2012
मैं तुम्हारा रहूँगा सदा ही प्रिये ....
मैं तुम्हारा रहूँगा सदा ही प्रिये
खींच दो चाहें कदमो में तुम हाशिए ..
सारे शेरों में चेहरा तेरा ही सजन
लफ्ज़ बदले कभी और कभी काफिये ..
है पुरानी गज़ल में नया शेर भी
थाम कर दिल ज़रा गौर फरमाइए ..
कोई दावा नहीं न मुक़ाबिल तेरा
इश्क गहरा मेरा कितना मत नापिए ..२० .९. २०१२
खींच दो चाहें कदमो में तुम हाशिए ..
सारे शेरों में चेहरा तेरा ही सजन
लफ्ज़ बदले कभी और कभी काफिये ..
है पुरानी गज़ल में नया शेर भी
थाम कर दिल ज़रा गौर फरमाइए ..
कोई दावा नहीं न मुक़ाबिल तेरा
इश्क गहरा मेरा कितना मत नापिए ..२० .९. २०१२
मंगलवार, 28 अगस्त 2012
कल 'मरणोपरांत' नाटक देखने से उपजे शेर ... लखनऊ ..
मेरे वजूद में वफ़ा से ऊब कर कोई
हर वक्त एक नयी वेवफाई तलाशे ..
मैं दिल पे उसके दुनिया नयी तो बसा गया
पर गैर उँगलियों के निशाँ कैसे मिटाता ..
अजीब कशमकश है तुम्हारे वजूद में
क्यों चाहता हूँ तुमको कोई और न चाहे ..
बस इतनी बात सुनकर हूँ सुकूं में दर्द कुछ कम है
तू मेरी फ़िक्र का है जिक्र करती उसकी बाहों में ..
त्रिशंकु ही रहा मेरा सफर मंजिल कहाँ मिलती
तेरी दुत्कार में भी प्यार झलक जाए है ..
हर वक्त एक नयी वेवफाई तलाशे ..
मैं दिल पे उसके दुनिया नयी तो बसा गया
पर गैर उँगलियों के निशाँ कैसे मिटाता ..
अजीब कशमकश है तुम्हारे वजूद में
क्यों चाहता हूँ तुमको कोई और न चाहे ..
बस इतनी बात सुनकर हूँ सुकूं में दर्द कुछ कम है
तू मेरी फ़िक्र का है जिक्र करती उसकी बाहों में ..
त्रिशंकु ही रहा मेरा सफर मंजिल कहाँ मिलती
तेरी दुत्कार में भी प्यार झलक जाए है ..
सोमवार, 6 अगस्त 2012
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