रूह शामिल है मेरी रूह में तुम्हारी
बाद तेरे भी रहे तेरी ही खुमारी ..२४.४.२०११
तुमको थोडा सा भुला लूँगा तो सो जाऊँगा
जगा के तुमको सुला लूँगा तो सो जाऊँगा.. ३१.३.११
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....