इश्क हो जाए तो कर लेना ,मगर ये याद रहे
माँ- बाप ने भेजा है तुम्हे पढने पढ़ाने ..
जलता है कलेजा टीस उठती है दिल में
वो मुझ को गिनाएं हैं उनके कितने दीवाने ..
ये ज़ुल्फ़ नयन होंठ गोरे गाल काला तिल
क्यों देती है कुदरत किसी को इतने खजाने ..
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....