जिंदगी बेमिसाल है यारों !!!

ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....

मंगलवार, 31 मार्च 2015

दर्द से कह दो की रहे हद में
वरना पछताएगा विधवा होकर

Posted by Unknown at 1:00 pm कोई टिप्पणी नहीं:
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
नई पोस्ट पुराने पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ (Atom)

जिंदगी बेमिसाल है यारों ...

मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें

Facebook Badge

Akhilesh Mishra | Create Your Badge

ब्लॉग आर्काइव

  • ▼  2015 (1)
    • ▼  मार्च (1)
      • दर्द से कह दो की रहे हद में वरना पछताएगा विधवा होकर
  • ►  2013 (7)
    • ►  जनवरी (7)
  • ►  2012 (8)
    • ►  सितंबर (1)
    • ►  अगस्त (2)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  फ़रवरी (1)
    • ►  जनवरी (3)
  • ►  2011 (22)
    • ►  दिसंबर (2)
    • ►  नवंबर (1)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  सितंबर (3)
    • ►  अगस्त (2)
    • ►  जून (5)
    • ►  अप्रैल (3)
    • ►  मार्च (2)
    • ►  फ़रवरी (1)
    • ►  जनवरी (2)
  • ►  2010 (22)
    • ►  दिसंबर (4)
    • ►  नवंबर (1)
    • ►  सितंबर (3)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  जुलाई (5)
    • ►  जून (1)
    • ►  मई (3)
    • ►  मार्च (2)
    • ►  फ़रवरी (2)

फ़ॉलोअर

Powered By Blogger
इनका कॉपीराइट है. यात्रा थीम. fpm के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.