सियासत की तरफदारी न कीजे
अजी ऐसी भी बेगारी न कीजे
बहुत मुश्किल निभाना दुश्मनी है
किसी अपने से गद्दारी न कीजे
वो बिटिया है , है दिल उसका भी कोमल
मुहब्बत में उजरदारी न कीजे
शहादत सर पटकती दफ्तरों में
मदद ऐसी भी सरकारी न कीजे
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....