लकडियाँ गीली हैं ठहर जाओ
छोड़ कर अधजला न घर जाओ ..२६-१-११ ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....
शनिवार, 29 जनवरी 2011
गुरुवार, 20 जनवरी 2011
सियासत मत तलाशो...
गए क़दमों की आहट मत तलाशो
वसीयत में वरासत मत तलाशो
ये दिल है .. टूटेगा तो रो पड़ोगे
मुहब्बत में सियासत मत तलाशो... १४-०१-2011
जीना दुश्वार कर लिया तूने
ये किसे प्यार कर लिया तूने
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)