तू जमीन है तू आसमान है मेरा
तू ही जन्नत है तू ही हूर भी है
होश है तू है तू ही मदहोशी
नशा भी तू नशे में चूर भी है
खो न दूं तुमको ये darr भी है
तू तो मेरी है ये गुरूर भी है
ये मेरी नितांत मौलिक रचनाएं हैं ... मेरे ह्रदय की भाषा .. जिन्हें मैं बस यूँ ही कह लेता हूँ ... कोई समझ लेता है ....
शुक्रवार, 17 सितंबर 2010
शुक्रवार, 10 सितंबर 2010
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