रविवार, 7 मार्च 2010

to kya ho

लाज बचाने को जब अपनी , सारे  अपनों से हारी 
पांच पति नतमस्तक बैठे , बची न किंचित भी सारी 
क्यों न जला डाले राखी को और मिटा डाले सिंदूर 
परिभाषित हो अबला क्यों जब शक्ति स्वरूपा है नारी .. 
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कहीं  सिमटा हुआ एक पल बिखर जाए तो क्या होगा
तुम्हारा अक्स दर्पण में सिमट जाए तो क्या होगा
चलो लेकर चलें एक छोटी सी दुनिया सफीने में
तुम्हारा प्यार जीवन से निकल जाए तो क्या होगा. .
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ये न कहना , तुम न आओगे
कैसे ख्वाबों का दिल दुखाओगे
और आओगे तुम जो उल्फत में
इस जमाने को क्या बताओगे ...
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आदमी बँट गया गुनाहों में
कशमकश कितनी उसकी राहों में
आ गया देर रात घर फिर भी
मन है सोया किसी कि बाहों में.....
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गुरुवार, 4 मार्च 2010

ishq tu bara vo hai

पूछते वो रहे ,,हम बता ना सके
रिश्ता उनका मेरा , मेरा उनसे है क्या
इश्क सारी हँदों से गुज़र भी गया
खींचते वो रहे सरहदें दरम्यान